Vrishchika Sankranti

Vrishchika Sankranti

Vrishchika Sankranti – वृश्चिक संक्रांति

Vrishchika Sankranti – सूर्य के तुला राशि से वृश्चिक राशि में प्रवेश करने की क्रिया को वृश्चिक संक्रांति कहा जाता है। हिन्दू पंचांग के अनुसार वर्ष में कुल 12 संक्रांति आती है। और हर राशि में सूर्य 1 माह तक भ्रमण करता है। सूर्य के इसी भ्रमण को संक्रांति कहा जाता है। संक्रांति के दिन दान-पुण्य करना का बेहद खास महत्व माना जाता है। इसलिए बहुत से लोग इस दिन भी वस्तुएं और खान पान की चीजें गरीबों में दान करते है। वृश्चिक संक्रांति के दिन संक्रमण स्नान, विष्णु और दान का खास महत्व होता है। इस दिन श्राद्ध और पितृ तर्पण का भी खास महत्व होता है।

वृश्चिक संक्रांति के दिन की 16 घड़ियों को बहुत शुभ माना जाता है। इस दौरान दान और पुण्य करना बहुत लाभकारी माना जाता है। यह दान संक्रांति मोमेंट में करना अच्छा माना जाता है। मान्यताओं के अनुसार वृश्चिक संक्रांति में ब्राह्मण को गाय दान करने का खास महत्व होता है।

वृश्चिक संक्रांति 2018 – वर्ष 2018 में वृश्चिक संक्रांति 16th नवंबर 2018, शुक्रवार के दिन मनाई जाएगी।

वृश्चिक संक्रांति पुण्य काल शुभ मुहूर्त: Vrishchika Sankranti Punya Kal Muhurut

16th नवंबर 2018 को मनाई जाने वाली संक्रांति पुण्य काल मुहूर्त = 12:05 से 17:23 तक।
मुहूर्त की अवधि = 05 घंटे 17 मिनट की होगी।

संक्रांति काल रात्रि 18:47 मिनट पर होगा।

संक्रांति के दिन महापुण्य काल का शुभ मुहूर्त = 15:37 से 17:23 तक।
मुहूर्त की अवधि = 01 घंटा 45 मिनट की होगी।

मार्गशीर्ष कृष्ण त्रियोदशी तिथि पर सूर्यदेव के वृश्चिक राशि में आगमन पर वृश्चिक संक्रांति पर्व मनाया जाएगा। ज्योतिषशास्त्र अनुसार सूर्यदेव एक माह में राशि परिवर्तन करते हैं। सूर्यदेव जब किसी राशि में प्रवेश करते हैंं तो उस काल को संक्रांति कहते हैं। हिंदू पंचांग अनुसार मार्गशीर्ष माह में जब सूर्य राशि परिवर्तन करते हैं तो उस संक्रांति को वृश्चिक संक्रांति कहते हैं। इस संक्रांति में सूर्य तुला से वृश्चिक राशि में प्रवेश करते हैं। भारतीय पंचांग अनुसार सूर्यदेव तुला राशि से वृश्चिक राशि में वर्ष 2018 में 16th नवंबर 2018, शुक्रवार के दिन पर प्रवेश करेंगे। यह संक्रांति गुरुवार पर पड़ने के कारण देव संक्रांति कहलाएगी। यह संक्रांति धार्मिक व्यक्तियों, वित्तीय कर्मचारियों, छात्रों व शिक्षकों के लिए अनुकूल रहेगी। वृश्चिक संक्रांति के विशिष्ट पूजन व उपाय से वित्तीय समस्याओं का निदान होता है, छात्रों की परीक्षा में सफलता मिलती है व शिक्षण कैरियर में सफलता मिलती है। 

पूजन विधि: प्रातः काल में सूर्यदेव का विधिवत दशोपचार पूजन करें। लाल तेल का दीप करें, गुग्गल की धूप करें, रोली, केसर, सिंदूर व आलता चढ़ाएं। लाल-पीले फूल चढ़ाएं, गुड़ में बने हलवे का भोग लगाएं तथा रोली, हल्दी व सिंदूर मिश्रित जल से सूर्यदेव को अर्घ्य दें। लाल चंदन की माला से इस विशेष मंत्र का 1 माला जाप करें। पूजन के बाद भोग प्रसाद रूप में वितरित करें। 

पूजन मंत्र: 

ॐ दिनकराय नमः॥

Like our facebook page.

Enter your email address to subscribe and get new post in your email: Delivered by RamayanInHindi.Com
Close Menu